Narak Chaturdashi: छोटी दिवाली के दिन पूरे घर पर क्यों घुमाया जाता है दीया, क्यों होती है यमराज की पूजा जानें इसके पीछे का कारण

नई दिल्ली। दीपावली के एक दिन पहले छोटी दीवाली मनाई जाती है। जिसे नरकचौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस साल दिवाली (Diwali 2020) का त्योहार 14 नवंबर यानी शनिवार को मनाया जाने वाला है। नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi) चतुर्दशी और काली चौदस के नाम से जाना जाता है।

छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है
ये बात बहुत कम ही लोग जानते होगें कि छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी क्यों कहा जाता है। इसके पीछे छुपी है एक पौराणिक कथा जिसके कारण इस दिन को नरकचौदस के नाम से जाने जाने लगा है।

नरक चतुर्दशी की पौराणिक कथा
इस प्रचलित कथा के अनुसार रति देव नाम के एक धर्मात्मा थे। जिन्होनें तन मन से लोगों की सेवा की कभी कोई ऐसा काम नही किया जिससे उन्हें पाप लगे। लेकिन इसके बाद भी मृत्यु के दौरान उन्हें नरक लोक मिला। यह देखकर उन्होंने यमराज से पूछ कि जब मैने कभी कोई पाप नहीं किया तो मुझे यहां पर लेकर क्यो आए हो।

यमराज ने कहा कि हे वत्स एक बार आपके द्वार से एक ब्राह्मण भूखा पेट लौट गया था, यह आपके उसी कर्म का फल है। यह बात सुनकर राजा हैरान हो गया और इसका प्रायश्चित करने के लिए उन्होनें यमराज से एक वर्ष का समय मांगा और ऋषियों के पास जाकर समस्या बताई तब ऋषियों ने उन्हें कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत रखने और ब्राह्मणों को भोजन कराकर उनसे माफी मांगने को कहा।

ऐसे शुरू हुई दीप जलाने की परंपरा
एक साल बाद यमदूत राजा को फिर लेने आए, इस बार उन्हें नरक के बजाय स्वर्ग लोक ले गए तब ही से कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष को दीप जलाने की परंपरा शुरू हुई। ताकि भूल से हुए पाप को भी क्षमादान मिल सके।

छोटी दिवाली को पूरे घर में घुमाया जाता है दीया
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक दिवाली से एक दिन पहले छोटी दिवाली जिसे नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है इसदिन की रात में घरों में बुजुर्ग व्यक्ति द्वारा एक दीपक जलाकर पूरे घर में घुमाया जाता है और उस दीपक को घर से बाहर कहीं दूर रख दिया जाता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक इस दिन भगवान कृष्‍ण, यमराज और बजरंगबली की पूजा करने से मनुष्‍य नरक में मिलने वाली यातनाओं से बच जाता है। और उसकी अकाल मृत्यु नही होती है।

द्वार पर क्यो जलाया जाता है दिया

छोटी दिवाली अमावस्या की रात से एक दिन पहले पड़ती है और इस दिन चांद नहीं दिखाई पड़ता है जिससे रात अधिंयारी हो जाती है। लोग आने जाने पर रास्ता भटक ना जाएं इसके लिए एक बड़ा दीपक घर के मुख्य द्वार पर जलाया जाता है।



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