Today Bhai Dooj: जानें भगवान श्री कृष्ण और उनकी बहन सुभद्रा से जुड़ी ये कथा

इस वर्ष यानि 2020 में आज 16 नवंबर, सोमवार को भाई दूज है। दीपावली पर्व के पांचवे व आखिरी दिन आने वाला ये भाई-दूज का त्यौहार भाई बहन के लिए बहुत महत्त्व रखता है। यह त्यौहार कार्तिक मास की शुक्ल द्वितीया को आता है। यह यम द्वितीया भी कहलाता है। यह दीपावली के पांच दिन का पर्व होता है। इस दिन दिवाली के पांच दिन का पर्व समाप्त हो जाता है।

मान्यता है कि इस दिन यमुना ने अपने भाई यमराज को अपने घर आमंत्रित करके उन्हें तिलक लगाकर अपने हाथ से खाना खिलाया था। जिससे यमराज बहुत प्रसन्न हुए थे और उन्होंने यमुना को मृत्यु के भय से मुक्त होकर अखंड सौभाग्यवती बने रहने का वरदान दिया था। वहीं यमुना ने भाई यम से ये आशीर्वाद भी मांगा कि हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को आप मेरे घर आया करो। और इस दिन जो भाई अपनी बहन के घर जाएगा और तिलक करवाएगा उसे यम व अकाल मृत्यु का भय नहीं होगा। इस पर यमराज ने तथास्तु कहकर अपनी बहन का वरदान पूरा किया।

भाई दूज का मुहूर्त 2020...

भाई दूज तिलक का समय :13:10:03 से 15:18:27 तक
अवधि : 02 घंटे 08 मिनट

इसके अलावा भाई-दूज की एक और कथा है, जो भगवान श्रीकृष्‍ण और उनकी बहन सुभद्रा से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि नरकासुर का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने इसी दिन गए थे। भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा ने फल, फूल, मिठाई और कई दीये जलाकर उनका स्वागत किया साथ ही सुभद्रा ने अपने घर में भगवान श्री कृष्ण का स्वागत करके अपने हाथों से उन्हें भोजन कराकर तिलक लगाया था। सुभद्रा ने भगवान श्री कृष्ण के मस्तक पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु की कामना की थी।

इस दिन से ही भाई दूज के मौके पर बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं और बदले में भाई उन्हें उपहार देते हैं।

श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा का उल्लेख हमें श्रीमद्भागवत पुराण और महाभारत में मिलता है। सुभद्रा श्रीकृष्ण और बलराम की बहन थी। वहीं पुरी (उड़ीसा) में ‘जगन्नाथ की यात्रा’ में बलराम और सुभद्रा दोनों की मूर्तियां भगवान श्रीकृष्ण के साथ ही रहती हैं।

ऐसा कहा जाता है कि सुभद्रा का विवाह कृष्ण ने अर्जुन से कराया था। लेकिन बलराम चाहते थे कि सुभद्रा का विवाह कौरव कुल में हो और बलराम के हठ के कारण श्री कृष्ण ने सुभद्रा का अर्जुन के हाथों हरण करवा दिया था। जिसके बाद में द्वारका में सुभद्रा के साथ अर्जुन का विवाह विधिपूर्वक संपन्न हुआ।

सुभद्रा से विवाह के बाद अर्जुन एक वर्ष तक द्वारका में रहे और शेष समय पुष्कर क्षेत्र में व्यतीत किया। 12 वर्ष पूरे होने पर वे सुभद्रा के साथ इंदप्रस्थ लौट आए। सुभद्रा के पुत्र अभिमन्यु थे, वहीं अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा थी जिसके गर्भ से परीक्षित का जन्म हुआ और परीक्षित का पुत्र जनमेजय था।


भाई दूज पर्व : कहां कैसे मनाया जाता है ये पर्व
देश के विभिन्न इलाकों में भाई दूज पर्व को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। दरअसल भारत में क्षेत्रीय विविधता और संस्कृति की वजह से त्योहारों के नाम थोड़े परिवर्तित हो जाते हैं, हालांकि इनका भाव और महत्व एक ही होता है।

1. यूपी में भाई दूज के मौके पर बहनें भाई का तिलक कर उन्हें आब और शक्कर के बताशे देती हैं। उत्तर प्रदेश में भाई दूज पर आब और सूखा नरियल देने की परंपरा है। आब देने की परंपरा हर घर में प्रचलित है।
2. नेपाल में भाई दूज पर्व भाई तिहार के नाम से लोकप्रिय है। तिहार का मतलब तिलक या टीका होता है। इसके अलावा भाई दूज को भाई टीका के नाम से भी मनाया जाता है। नेपाल में इस दिन बहनें भाइयों के माथे पर सात रंग से बना तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी आयु व सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
3. पश्चिम बंगाल में भाई दूज को भाई फोटा पर्व के नाम से जाना जाता है। इस दिन बहनें व्रत रखती हैं और भाई का तिलक करने के बाद भोजन करती हैं। तिलक के बाद भाई भेंट स्वरूप बहन को उपहार देता है।
4. बिहार में भाई दूज पर एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। दरअसल इस दिन बहनें भाइयों को डांटती हैं और उन्हें भला-बुरा कहती हैं और फिर उनसे माफी मांगती हैं, दरअसल यह परंपरा भाइयों द्वारा पहले की गई गलतियों के चलते निभाई जाती है। इस रस्म के बाद बहनें भाइयों को तिलक लगाकर उन्हें मिठाई खिलाती हैं।
5. महाराष्ट्र और गोवा में भाई दूज को भाऊ बीज के नाम से मनाया जाता है। मराठी में भाऊ का अर्थ है भाई, इस मौके पर बहनें तिलक लगाकर भाई के खुशहाल जीवन की कामना करती हैं।



source https://www.patrika.com/astrology-and-spirituality/bhai-dooj-katha-related-with-shri-krishna-and-his-sister-subhadra-6520704/

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